आईए महेश्वर की खूबसूरती का दीदार करें


माय टाइम्स टुडे। महेश्वर का इतिहास लगभग 4500 वर्ष पुराना है. यह एक समय होल्कर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था. होल्कर महारानी देवी अहिल्या शिव भक्त थी.वह भगवान शंकर की पूजा किए बिना पानी तक ग्रहण नहीं करती थी. वह भगवान शिव की इस हद तक अनन्य भक्त थी कि अपने हस्ताक्षर की जगह श्री शंकर लिख देती थी.
रामायण काल में महेश्वर को माहिष्मति के नाम से जाना जाता था.उस समय हैहय वंश के राजा सहस्राजुर्न शासन करते थे. महाभारत काल में इसे अनूप जनपद की राजधानी बनाया गया था. कालिदास ने रघुवंशम् में इंदुमति के स्वयंवर प्रसंग में नर्मदा तट पर माहिष्मति का वर्णन किया है. महारानी अहिल्या बाई ने औरंगजेब द्वारा नष्ट किए गए कालांतर के किलों का पुन: उद्धार कराया.अनेक मंदिर बनाए और महेश्वर को पुन: सम्पूर्ण सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया.
महेश्वर के दर्शनीय स्थल :
महेश्वर किला –

महेश्वर किला नर्मदा नदी के तट पर बना है.यह किला बाहर से जितना सुंदर दिखता है उससे कही अधिक अंदर से मनोरम दृश्यों को संजोयें हुए है. यहां किले को देखने के लिए हर दिन हजारों की संख्यां में सैलानी आते है.
शिव मंदिर :

किले के पास ही भगवान शिव का मंदिर है.वैसे तो पूरे परिसर में कई शिव मंदिर और शिव लिंग बने है. इनमें से राजराजेश्वर शिव मंदिर सबसे आकर्षक है.इसका निर्माण महारानी अहिल्याबाई ने कराया था.
देवी अहिल्या का पूजा स्थल :

क़िले के अंदर देवी अहिल्या का पूजा स्थल है, जहाँ पर अनेकों धातु के तथा पत्थर के अलग-अलग आकार के शिवलिंग, कई सारे देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और एक सोने का बड़ा-सा झुला है, जो यहाँ का मुख्य आकर्षण है, जिस पर भगवान कृष्ण को बैठाकर अहिल्याबाई होल्कर झुला दिया करती थीं.
होटल अहिल्या फोर्ट:


देवी अहिल्याबाई के पूजा घर से कुछ कदमों की दुरी पर ही एक लकड़ी का द्वार स्थित है, जिसके अन्दर एक आलिशान महल है, जो कभी होल्कर राजवंश के शासकों का निजी आवास हुआ करता था. लेकिन आजकल इस महल को एक हेरिटेज होटल का रूप दे दिया गया है और इस होटल में एक अच्छे तीन सितारा होटल के समकक्ष सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

महारानी अहिल्याबाई के बारें में जानने के लिए यहां जाएं 

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