धर्म के अनुरूप ही कर्म का फल मिलता है प्रो बीके कुठियाला


माय टाइम्स टुडे, भोपाल। हमारे कर्म का फल धर्म के अनुसार मिलता है। हमारे उत्थान व पतन का कारण भी कर्म ही है। इसलिए हमें कर्म करते समय उचित-अनुचित का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि धर्म के अनुसार ही कर्म के फल का निर्धारण होता है। माखनलाल पत्रकारिता विवि के कुलपति प्रोफेसर बीके प्रो. कुठियाला ने ‘गीता में कर्मयोग’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में ये बातें कही।प्रो. कुठियाला ने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने कहा था कि यह सृष्टि मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाती हैं। गीता में कर्मयोग के श्लोकों का प्रश्नोत्तर शैली में वर्णन किया गया है। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के प्रश्नों के उत्तर में भक्ति योग, और कर्म योग के मीमांसा दर्शन की बात की है। वही मुख्य वक्ता और सनातन धर्म-दर्शन के मनीषी  ज्ञानवर्धन पाठक ने कहा कि गीता के 18 अध्याय और 700 श्लोकों में ज्ञान, भक्ति, योग और कर्म की विस्तृत व्याख्या की गई है। प्रो पाठक ने अत्यंत सूक्ष्म  विवेचना के माध्यम से तथा सांसारिक कथाएं एवं उदाहरणों के माध्यम से गीता का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि हम जैसा सोचते हैं वैसा करते हैं, ऐसी हमारी आदत बन जाती है, अंतर्राष्ट्रीय शोधों में भी यह सिद्ध हुआ है कि यदि कोई व्यक्ति 21 दिन तक कोई भी कार्य करता रहे तो वह आदत में बदल हो जाती है। हमारा स्वभाव भी वैैसा ही बन जाता है और फिर उसके बाद वैसी ही हमारी प्रकृति बन जाती है, वैसे ही हमारे गुण होते हैं और  वैसे ही हमारे संस्कार बन जाते हैं। इन्ही संस्कारों के कारण हम पुनर्जन्म को प्राप्त करते हैं।

गीता में वास्तिव रूम में विवेचना के माध्यम से उन्होंने कर्मयोग, ब्रह्मांड, आकाशगंगा, के अलावा सूर्य, चंद्रमा, वायु, जल, मिट्टी आदि के अनेक दृष्टांत प्रस्तुत किया और कहा की यह सभी कर्मयोग के प्रतीक है।सत्य, धर्म, शांति, प्रेम पर जो अमल करता है वही उसका श्रेष्ठ कर्म है।
इस मौके पर एड. सांघी ने कहा कि गीता से कर्म की प्रेरणा मिलती है और हमें ये यह संदेश भी मिलता है कि हम विवेक और बुद्धि के साथ कार्य करें।
कार्यक्रम का आयोजन विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की शाखा भोपाल ने सरोजिनी नायडू कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागृह में किया था। इस अवसर पर सौरभ शुक्ला ने विवेकानंद केंद्र का परिचय प्रस्तुत किया।वही विवेक और कुनिका ने गीत प्रस्तुत किया।जबकि अभिषेक ने विवेक वाणी प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का संचालन रमेश कुमावत ने किया।

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