विशेष : क्या है डाउन सिंड्रेम , कैसे करें बच्चों की देखभाल

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MY TIMES TODAY.वर्तमान समय में डाउन सिंड्रोम एक गंभीर बीमारी के रूप में सामने आया है. भारत में प्रतिवर्ष एक मिलियन बच्चे इस गंभीर बीमारी के चपेट में आते हैं और अत्यंत दुखकर जीवन जीने पर मजबूर हो जाते हैं. आंकड़े बताते हैं कि डाउन सिंड्रोम पीड़ितों की संख्यां दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. कई सर्वे और शोध इस बात की तरफ इशारा करते है कि यह गंभीर बीमारी आदिवासी क्षेत्रों में अधिक है. इसके पीछे यह तर्क है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कम उम्र में मां बनने की वजह से बच्चें डाउन सिंड्रोम की चपेट में आ जाते है.

क्या है  डाउन सिंड्रोम : यह एक आनुवंशिक समस्या है, जो क्रोमोजोम की वजह से होती है. सामान्यत: गर्भ के दैरान भ्रूण को 46 क्रोमोजोम मिलते हैं, जिनमें 23 माता व 23 पिता के होते हैं. लेकिन कभी कभी मैच्योरिटी नहीं होने की वजह से माता के गर्भ एक अतिरिक्त x क्रोमोजो़म का प्रवेश हो जाता है. जिसकी वजह से क्रोमोज़ोम की संख्या बढ़ जाती है. डाउन सिंड्रोम पीडित बच्चे में 21वें क्रोमोजोम की एक प्रति सामान्य से अधिक होती है.ऐसे बच्चों मेें 46 की जगह 47 क्रोमोजोम पाए जाते हैं, जिससे उसका मानसिक व शारीरिक विकास धीमा हो जाता है और कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. पश्चिमी देशों में किए गए अध्ययनों के मुताबिक, 75% डाउन सिंड्रोम से ग्रसीत बच्चे कान और सुनने की समस्यया से जूझ रहे है.  वहीं 50-75% नेत्र रोग, 22% मनोवैज्ञानिक विकार और हृदय रोग से 50% से ग्रस्त हैं. भारत के तीन महानगरीय शहरों मुंबई, दिल्ली और बड़ौदा में 94, 9 10 नवजात शिशु इस बीमारी के शिकार हैं.

परिणाम :

हाइपोथायरायडिज्म: क़रीब 15 प्रतिशत डाउन सिंड्रोम के लोगों में हाइपोथायरायडिज्म होती है.जिससे गर्दन संबंधी अनेक बीमारियां घेंघा आदि हो जाता है.
सुनने एवं देखने की समस्या-

डाउन सिंड्रोम के व्यक्तियों को सुनने एवं देखने की समस्याओं का ख़तरा बढ़ जाता है.

रक्त कैंसर-

इसके अतिरिक्त, क़रीब 1 प्रतिशत डाउन सिंड्रोम के बच्चों में रक्त-निर्माण कोशिकाओं (ल्यूकेमिया) का कैंसर होता है.

अल्जाइमर रोग-
डाउन सिंड्रोम के वयस्कों में अल्जाइमर रोग सामान्यत: होता है.जिससे स्मृति, निर्णय एवं कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है.
इसके साथ साथ हृदय रोग, सांस लेने में समस्या, चेहरे और शरीर के अंग की विकृति आदि इसके गंभीर परिणाम है.

कैसे बचें : सामान्यत: डाउन सिंड्रोम का इलाज नहीं होता है. हालांकि कम उम्र में मां बनना या 35 से अधिक की उम्र में मां बनना इस बीमारी की बड़ी वजह होती है. गर्भावस्था के दौरान ही डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है. अधिकतर मामलों में देखा गया है की माता पिता गर्भपात कराना बेहतर समझते है. आपको बता दें कि इस बीमारी का अभी तक बेहतर इलाज संभव नहीं हो सका है ऐसे में यह जरूरी है कि इन बच्चों को माता पिता की ही तरफ प्यार और सामाज का सकारात्मक रवैया बेहद जरूरी है. परेशानियां तो हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम के बावजूद व्यक्ति एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है.

 

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