सीतामढ़ी में गरीबों के बीच शिक्षा का अलख जगा रहे है सन्नी दसवी तक के बच्चों को मिलती है मुफ्त शिक्षा


MY TIMES TODAY. सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बिशनपुर गोनाही. इस गांव में दूर – दूर तक शिक्षा की सुचारू व्यवस्था नहीं है. गांव में ज्यादातर गरीब लोग है जो स्वयं अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है. खासकर के मुस्लिम समुदाय के बच्चों की शिक्षा की स्थिति और भी चिंताजनक है. इस गांव के युवक सन्नी कुमार भारती ने 2012 में ‘ नवयुग सृजन’ नाम से एक संस्था बनाई जिसके माध्यम से वह ग्रामिणों और गांव के गरीब बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहे है. सन्नी के इस नेक काम की सराहना भी हो रही हैं. अभी हाल ही में पटना में सन्नी को इस नेक काम के लिए सम्मानित भी किया गया था. सन्नी बताते है कि उनके लिए यह सफर काफी चुनौतिपूर्ण भरा रहा है. आज हमने सन्नी कुमार भारती से उनके संस्थान और उनके अबतक के सफर के बारे में जानने की कोशिश की.
नाना जी देशमुख से मिली प्रेरणा…..
सन्नी बताते है कि उनको इस संस्था को शुरू करने की प्रेरणा नाना जी देशमुख से मिली. वह नाना जी के कामों व गांव के विकास में उनके योगदानों से बहुत प्रभावित है.
दिल्ली की पढ़ाई छोड़ गांव में खोली संस्था …
नवयुग सृजन के मार्गदर्शक सन्नी बताते है कि वह दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. वह अपनी पढ़ाई अभी पूरी भी नहीं कर पाए थे कि उनको गांव की शिक्षा और गरीबी ने बुला लिया. सन्नी अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वापस अपने गांव आ गए. गांव के कुछ युवकों के साथ मिलकर सन्नी ने 2012 में नवयुग सृजन नामक संस्थान की नींव रखी.
महज 6 बच्चों से शुरू हुई संस्था आज 50 से ज्यादा बच्चे पा रहे हैं नि: शुल्क शिक्षा…
सन्नी बताते है कि जब उन्होंने संस्थान की शुरूवात की तो उन्हें बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. आर्थिक समस्या तो थी ही साथ सन्नी को तब कुछ लोगों की आलोचनाएं भी सुननी पड़ी. लेकिन सन्नी हार मानने वाले कहां थे. उन्होंने और उनके मित्रों ने 100-100 रूपए जुटाकर संस्था को सामाज के लिए समर्पित कर दिया. सन्नी आगे बताते है कि जब संस्थान की शुरूवात हुई तो उस समय सिर्फ 6-7 बच्चे थे और आज 50 से अधिक बच्चे मुफ्त में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.
10 वीं की परीक्षा देने वाले गरीब बच्चों के लिए मुफ्त में कोचिंग की व्यवस्था …
नवयुग सृजन संस्था के बैनर तले दसवीं की परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए मुफ्त में कोचिंग की व्यवस्था दी जाती है. इसके लिए संस्थान ने 7 शिक्षकों रखा है जिनमें से तीन शिक्षकों को आंशिक वेतन दिया जाता है, शेष सभी नि: शुल्क पढ़ाते है. संस्थान के मार्गदर्शक सन्नी स्वयं नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाते है. पिछले साल संस्थान के 20 छात्रों ने दसवीं की परीक्षा दी थी और सभी बच्चे सफल भी रहे थे.इस वर्ष बच्चों की संख्यां 30 हो गयी है.

कहां से मिलता है आर्थिक सहयोग : 

सन्नी बताते है कि उनके इस काम में उनके गांव के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है. गांव व आस पास के सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग इस संस्थान के लिए आर्थिक रूप से सहयोग करते है. साथ ही संस्थान के बाहर एक दान पेटी रखी हुई है जिसमें लोग यथाशक्ति दान करते है. 

सामाजिक अभियान के प्रति भी बच्चों को करते है जागरूक : 

सन्नी बताते है कि वह बच्चों में सामाजिक जागरूकता लाने के लिए शिक्षा के साथ – साथ स्वच्छता और अनुशासन पर भी जोर देते है. वह समय समय पर इसके लिए स्वच्छता अभियान और नाटक का मंचन भी करते है. 

आगे क्या है योजना : 

सन्नी ने कहा कि वर्तमान समय में संस्थान के पास अपना भवन नहीं है. खुले आसमान में बच्चे पढ़ते है. सन्नी को सरकार की तरफ से किसी मदद की जरूरत भी नहीं है. वह स्वयं ही गांव वालों के सहयोग से जल्द ही संस्थान के लिए भवन बनाने की योजना बना रहे है. माय टाइम्स टुडे से बातचीत के दौरान सन्नी ने बताया कि वह चाहते है कि अधिक से अधिक लोग उन्हे सहयोग करे. साथ ही आस पास के अन्य गांवों में भी लोग इससे प्रेरणा लेकर शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करें.  आगे सन्नी गांव के गरीब बच्चों और युवाओं को शिक्षित करने के लिए पुस्तकालय खोलने की योजना भी बना रहे है. इसके लिए उन्होंने लोगों से सहायता की अपील भी की. 

किन किन लोगों का रहा सहयोग : 

सन्नी ने बताया कि इस संस्थान को खोलने और सुचारू रूप से चलाने में गांव वालों ने बहुत सहयोग किया है. कुछ लोगों ने आर्थिक सहयोग किया तो वही कुछ लोग नि:शुल्क पढ़ाने का कार्य करते है. गांव के सरकारी स्कूल के शिक्षक और राष्ट्रपति से सम्मानित राजकिशोर राउत संस्थान के लिए बहुत सहयोग करते है. वह आर्थिक सहायता के साथ साथ संस्थान के लोगों को प्रेरित भी करते है. इसके अलावा जियाउद्दीन उर्फ तन्नू, मनोज बैठा, शिक्षक रंजीत बैठा, श्री नारायण कुमार, ई. प्रबिण कुमार, अफजल लहेरी, ओमप्रकाश मंडल, अखिलेश कुमार,शिक्षक असलम, नारायण महतो और देवेन्द्र साह नेे संस्थान के संंचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

नवयुग सृजन के मार्गदर्शक सन्नी कुमार भारती से टेलिफोन पर बात-चीत पर आधारित.

 

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