पूर्व का ‘ऑक्सफोर्ड’ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 130 वर्ष पूरे आईए जानते है इस विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत को


MY TIMES TODAY. शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 130 वर्ष पूरे हो गए । देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में शुमार इस विश्वविद्यालय ने कई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, न्यायमूर्ति, सैकड़ों प्रशासनिक अधिकारी, संविधानविद् एवं अधिवक्ता दिए है। निश्चित रूप से इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा उसके संगठक कॉलेजों के छात्रों को गर्व की अनुभूति होनी चाहिए कि वो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र हैं या रहे हैं। आईए एक नजर डालते इस विश्वविद्वयालय कीी गौरवशाली परंपरा पर…

1. 23 सितम्बर साल 1887 को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई.

2: पहले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कोलकाता यूनिवर्सिटी की एक इकाई की तरह काम करती थी.

3. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी एक पब्लिक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है.

4. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी भारत की चौथी सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी है.

5. एक समय पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को पूर्व का ऑक्सफ़ोर्ड कहा जाता था

6. 24 साल 2005 को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्ज़ा प्राप्त हुआ.

7.  इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पहले एक कालेज के तौर पर ब्रिटिश शासन के समय के लेफ्टिनेंट सर विलियम मुइर (William Muir) द्वारा स्थापित किया गया था.

8. विश्वविद्यालय की मान्यता मिलने से पहले इसे Muir सेंट्रल कालेज के नाम से ही जाना जाता था.

9. 9 दिसम्बर साल 1873 को Muir Central कॉलेज की स्थापना हुई थी.

10. विलियम एमर्सन ने बिल्डिंग को डिजाईन किया था. कोलकाता में स्थित विक्टोरिया मेमोरियल और मुंबई का क्राफोर्ड मार्केट (Crawford Market) को भी इन्होंने ही डिजाईन किया था.

11. इलाहाबाद विश्वविद्यालय का सीनेट ह़़ॉल देश की सबसे अच्छी बिल्डिंग्स में से एक है और उत्तर प्रदेश की बेस्ट बिल्डिंग मानी जाती है.

12. सीनेट हॉल का उद्घाटन साल 1912 में लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जॉन हेवेट (John Hewett) ने किया था.

13. साल 1951 में  विश्वविद्यालय ने इलाहाबाद के विभिन्न कालेजों को मान्यता दी.

14. साल 1992 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को विशेष अग्रणी संस्था का दर्जा दिया था.

15. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभागों को यूजीसी सेंटर फॉर एडवांस स्टडी से मान्यता प्राप्त है.

16. इलाहाबाद विश्वविद्यालय का ध्येय वाक्य Quote Rami Tot Arbores है जो कि लैटिन भाषा से लिया गया है. जिसका अर्थ होता है “जितनी ज्यादा शाखाएं, उतने ज्यादा पेड़”

17. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अब तक देश को एक राष्ट्रपति, एक उप-राष्ट्रपति, 3 प्रधानमंत्री , कई राज्यों के मुख्यमंत्री, 3 मुख्य न्यायाधीश और एक सेना प्रमुख मिले हैं.

18. भारत रत्न मदन मोहन मालवीय भी इसी विश्वविद्यालय में पढ़े थे.

19. साल 2003 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति पर एक फिल्म हासिल भी बन चुकी है जिसे तिगमांशु धूलिया ने निर्देशित किया था.

20. साल 1987 में विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट भी जारी हुआ था.

स्थापना दिवस विशेष :एक पूर्व छात्र

एक ऐसा विश्वविद्यालय जहाँ पढ़ने के लिए पूर्वांचल के एक छोटे गांव से लेकर बुंदेलखंड के खण्डहर तक, रुहेलखंड की सीमाओं से लेकर अवध की शान बने शहरों तक के छात्र प्रयासरत रहते हैं।
एक ऐसा विश्वविद्यालय जो लाखों छात्रों के अरमानों, लाखों माँ बाप की आशाओं तथा लाखों बहनों के प्यार को सह देता है।
ऐसा विश्वविद्यालय जो अपने गांव से सिपाही और चपरासी बनने का सपना लेकर आने वाले छात्र को आईएएस, आईपीएस अधिकारी, राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री बनने का सामर्थ्य देता है।
एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसने अपने कण कण मे राष्ट्रवाद को समाहित किया है।
ऐसा विश्वविद्यालय जिसने अपने अन्दर भारत की एकता और अखण्डता के सार्वभौमिक प्रतीक अनेकता मे एकता को समाहित किया है।
एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसने सभी संस्कृतियों को संरक्षण प्रदान किया है।

एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसने देश को हज़ारों आईएएस-आईपीएस , कई हज़ार नौकरशाह, राष्ट्रपति, 2 प्रधानमंत्री, दर्जनों मुख्यमंत्री, सैकड़ों कैबिनेट मंत्री तथा हज़ारों साहित्यकार दिए । एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसके छात्रसंघ का अतिथि बनना प्रधानमंत्री तक के लिए गर्व का विषय होता है।

एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसका प्रतिनिधित्व अपने अपने समय की महान हस्तियों सुभाष कश्यप, डी०एस०कोठारी, मेघनाद साहा, राजेन्द्र सिंह(रज्जु भैया), चंद्रशेखर, शंकर दयाल शर्मा, मुरली मनोहर जोशी, वीपी सिंह, अर्जुन सिंह, जैसे देश के क्षितिजों ने किया।

एक ऐसा विश्वविद्यालय जिसके छात्रसंघ का प्रतिनिधित्व अपवादों को छोंड़ दे तो बौद्धिक योद्धाओं ने किया। चाहे वो सुभाष कश्यप हों, अनुग्रह नारायण सिंह हों या वर्तमान में रोहित मिश्र और विक्रान्त सिंह जैसे शशक्त बौद्धिक।

130 वर्षों की गौरवमयी यात्रा के लिए अपने आप मे अद्वितीय, अतुल्य, अनुकरणीय, अहोभाग्य इलाहाबाद विश्वविद्यालय को सादर प्रणाम तथा एक निवेदन विश्वविद्यालय के उन तमाम छात्रो,प्रतिनिधियों तथा कर्णधारों से कि आप इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र हैं, ये अपने आप में गर्व का विषय है, आने वाली पीढ़ियाँ भी आप पर गर्व करे तथा विश्वविद्यालय की अस्मिता बनी रहे इसके लिए आप सभी आज यह शपथ लें कि ऐसा कोई कार्य नही करेंगे कि जिससे विवि की अस्मिता को आँच आये ।

जय इलाहाबाद विश्वविद्यालय!!!

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