Special Interview : पहले विचारों की प्रधानता होती थी, आज चेहरे प्रधान हो गए – सुमंत भट्टाचार्य

माय टाइम्स टुडे। आज हमारे साथ है देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार सुमंत भट्टाचार्य। आज के दौर में पत्रकारिता कैसी होनी चाहिए? युवा पत्रकारों को किस तरह से पत्रकारिता करनी चाहिए? ऐसे गंभीर सवालों का जवाब जानने के लिए हमने सुमंत भट्टाचार्य से विशेष बात- चीत की है।

एक पत्रकार का जीवन कैसा होना चाहिए ?
सुमन्त – पत्रकारिता दरसल समाज के विश्वास की पूंजी पर चलती हैं, इसलिए एक पत्रकार का जीवन पारदर्शी होना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे एक भारतीय संत का जीवन होता हैं जिनका शयन कक्ष और रसोई तक समाज की नजर में रहता हैं ।और आजादी के काल से पत्रकारिता ने यह विश्वास अर्जित भी किया है। चाहे महात्मा गांधी हो,गणेश शंकर विद्यार्थी हो या दादा माखनलाल सभी ने एक त्यागी संत की तरह अपनी पत्रकारिता को जिया, जिनकी लेखनी पर जनता का विश्वास होता था। पत्रकारिता सामाजिक सरोकार का विषय हैं जो भी लिखें जहां भी लिखे उस पर लोगों का विश्वास कायम रहे। आज अगर लिखे पर लोगों का विश्वास नहीं हैं तो फिर पत्रकार सामाजिक जीवन से कट चुका है।
ऐसा नहीं हैं कि गांधी जी, गणेश शंकर जी, तिलक जी आदि को प्रलोभन नही मिले होंगे, परन्तु उन्होंने अपने वसूलों से समझौता नहीं किया और आज भी वे लोग पत्रकारिता की पहली पंक्ति में खड़े हैं। जब उल्फा टाटा का प्रकरण हुआ था तब अखबार ने करोड़ों के विज्ञापन के प्रलोभन को छोड़कर खब़र को छापा था। इसलिए हमेशा निष्पक्ष और साहस के साथ अपनी बात कहनी चाहिए, सच का साथ जनता देती हैं।
.जब आपने शुरूवात की थी तब से अब तक कितनी बदल गई हैं पत्रकारिता?
सुमन्त- पहले की पत्रकारिता सम्पादकों पर चलती थी और आज मालिकों का अधिपत्य हो गया है। एक ही मालिक मीडिया हाउस भी चलाता हैं, कारपोरेट का भी मालिक हैं, रियल इस्टेट का भी धंधा करता हैं। अभी कुछ ही दिन पहले टाइम्स ऑफ इंडिया के पूर्व संपादक दिलीप पडगांवकर का निधन हुआ परन्तु आज का युवा नहीं जानता, सुरेंद्र किशोर जी जो फेसबुक पर लिखते हैं पर युवा पढ़ता नहीं। पहले विचारों की प्रधानता होती थी और आज चेहरे प्रधान हो गए हैं। जाहिर सी बात है जब सुंदर चेहरे को हम जगह देंगे तो सुंदर विचार दब के रह जाएंगे। पहले पत्रकारिता जनमानस की आवाज होती थी, जन चेतना का माध्यम होती थी और आज विज्ञापनों की भीड़ में आवाज दब गई हैं। मुझे याद है जब मैं जनसता में था तब प्रभाष जोशी जी सम्पादकीय लिखते थे तो उसी पन्ने पर उनकी आलोचना करने वालें लेखकों के लेख भी छपते थे और मैंने भी यही परंपरा कायम रखी। अगर मेरे पत्रकार ने रिश्वत ली हैं तो आप बताइए हम उस खब़र को छापेंगे। अब आत्मलोचना की परंपरा नहीं रही जिससे जनता का विश्वास भी खतम होते जा रहा है। आज पत्रकारिता ढिंढोरची बन के रह गया हैं, कभी इस नेता का ढिंढ़ोरा पीट रहा है तो कभी उस नेता का।
आज तो टेलिविजन स्टूडियो में बैठ कर बड़ी बड़ी बातें सब कर लेते हैं ,परन्तु उनमे हिम्मत नहीं हैं कि वह जनता से सीधे संवाद कर सके ।आप देख सकते है आज सोशल मीडिया पर गालियां भी खानी पड़ रही हैं। आज तो इन्हें चेहरा छुपाने की जगह नहीं मिल रही हैं। आज दौर बदल गया है, अब सबके पास एंड्रवाएड फोन हैं और सभी किसी न किसी रुप में पत्रकार हैं तो अब सच से छुपने की जगह नहीं है।
नोटबंदी पर आपके क्या विचार हैं, काला धन को रोकने में यह कितना कारगर होगा?
सुमन्त- मैं मनमोहन सिंह की बात से सहमत नहीं हूं कि इससे जीडीपी में गिरावट आयेगी। आज जो बैंको में 23 करोड़ 24 करोड़ रूपए जमा हो रहे हैं ये कल को आर्थिक मजबुती प्रदान करेंगे। देश का काला धन जो आतंकवाद, नक्सलवाद आदि पर खर्च होता था, आज उनकी कमर टूट गई हैं। आज पूरा देश मोदी के साथ है इसलिए बंद को लेकर पुरा विपक्ष बंटा हुआ हैं। नीतूश कुमार का समर्थन करना आम बात नही है। वह भी जनता का मूड भांप रहे है। इसलिए मैं कहूंगा कि यह सरकार का साहसिक कदम है और काले धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह जरुरी भी था।
यूपी और पंजाब के चुनाव पर नोटबंदी का कितना असर होगा ?
सुमन्य- निश्चित तौर पर असर होगा, अब राजनीति जाति के पाले से निकलकर अमीर और गरीब के बीच आ खड़ी हुई हैं।और निश्चित तौर पर इसका फायदा BJP को होगा। अब पैसों के बल पर तरह तरह के हथकंडे अपनाना संभव नहीं हैं और ना ही टिकटों की खरीद फरोक्त होगी। आज आम आदमी पार्टी पंजाब में सतलज यमुना प्रकरण पर बेनकाब हो गई है। आप एडीआर की रिपोर्ट पढ़िये तो पता चलेगा कहां कहां से इनकी फंडिंग होती हैं। तो मुझे तो लगता है भाजपा को सीधे तौर फायदा होगा।
आज के नन्हें कलमकारों को आप क्या सुझाव देंगे ?
सुमन्त- आज के युवाओं से सीधे संवाद की जरुरत हैं और मैं युवाओं को आमंत्रित करता हूं कि हम स्वयं अपना वेब चैनल तैयार करें, अपनी छोटी मोटी कुरबानियां देकर खूद का चैनल तैयार करें, जिसमें हम सभी रिपोर्टर हों, सभी पत्रकार हो और सोशल साइट्स जैसे संसाधनों का सहारा लेकर हम अपनी आवाज को आम जनता तक पहुंचा सके। हम दूसरों के सहारे न होकर स्वयं अपनी टीम बनाकर जनता की आवाज का माध्यम बने।

सुमन्त भट्टाचार्य
टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप से पत्रकारिता की शुरुआत। 8 साल जनसत्ता और 5 साल इंडियन एक्सप्रेस ,आउटलुक, न्यूज एक्सप्रेस आदि चैनल में काम किया। सोशल मीडिया पर तमाम ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से लेखन,  प्रमुख टीवी चैनल्स में पैनलिस्ट.  एक राष्ट्रीय चैनल के सलाहकार।

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