हमें कलम से कलाम तक का सफर तय करना है : दीदी मंदाकिनी

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माय टाइम्स टुडे, भोपाल, 28 जुलाई।माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय ने नए छात्रों के मार्गदर्शन व पत्रकारिता के क्षेत्र में अवसर तथा चुनौतियों से अवगत कराने के लिए भोपाल के समन्वय भवन में सत्रारंभ समारोह का आयोजन किया है। शुक्रवार को तीन दिनों तक चलने वाले समारोह के दूसरे दिन सत्रारंभ के अंतिम सत्र में राष्ट्र निर्माण में युवा विषय पर छात्रों को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध राम कथा वाचक दीदी मंदाकिनी ने कहा कि युवा ही राष्ट्र की शक्ति है। हमें अपनी उर्जा शक्ति का सदुपयोग करते हुए भारत को फिर से विश्व गुरू बनाना है। दीदी ने नवागंतुक छात्रों को पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम की महानता का उल्लेख करते हुए कहा कि आप सभी को अपनी कलम से कलाम तक का सफर तय करना है। और उनके सपनों के भारत का निर्माण करना है।

भारत हमारे लिए केवल भूखंड मात्र नहीं है :

दीदी मंदाकिनी ने कहा कि हमारा भारत केवल भूखंड मात्र नहीं है।भारत हमारी माता है।हम सुबह उठकर पैर रखने से पहले धरती मां से क्षमा याचना करते है। भारतीय संस्कृति की विशिष्ठता का वर्णन करते हुए दीदी ने कहा कि सनातन काल से जड़ को भी चेतन समझने समझने की परंपरा रही है। हम नदियों को भी सिर्फ पानी का स्रोत न समझकर माता मानते है। हम नदियों का श्रृंगार करते है, उनका पूजन करते है।

आज सकरात्मक चिंतन का अभाव हो गया है :

दीदी ने वर्तमान संदर्भ के बारे में बात करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सकरात्मकता का लोप हो गया है। आज सफलता के होड़ में प्रतिस्पर्धा की बजाय संघर्ष और आक्रमता व्याप्त हो गयी है।आज भाई – भाई में द्वेष हो गया है, पिता पूत्र में विश्वास का पतन हो गया जो राष्ट्रनिर्माण की दृष्टि से सही नहीं है।

प्रेम का आधार हीं विश्वास है:

दीदी मंदाकिनी ने रामचरित मानस के प्रसंग उल्लेख करते हुए कहा कहा कि प्रेम की आधारशिला विश्वास है, समर्पण है, वासना नहीं। हमारी संस्कृति में प्रेम के त्वदीय रूप को स्वीकार किया गया है। दुनिया में एक मात्र ईश्वर ही है जो सभी से नि: स्वार्थ प्रेम करता है।  सभी जीव जंतुओं में ईश्वर का दर्शन करना हीं भारतीय चिंतन का आधार है।

राम राज्य हमारी संस्कृति में है:

दीदी ने कहा कि हमारा भारत राम राज्य की संस्कृति का वाहक है। हमारे देश में विकास का मानक सिर्फ अच्छी सड़के, बड़ी बड़ी ईमारते नहीं हो सकती है। इन सभी चीजों से  भौतिक विकास तो हो सकता है पर वास्तविक विकास के लिए मानसिक विकास होना जरूरी है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० बृजकिशोर कुठियाला, जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी, डॉ अविनाश वाजपेयी, डॉ पवन मलिक, डॉ राखी तिवार, लोकेंद्र सिंह राजपूत सहित अन्य गणमान्य लोग मौजुद थे। आपको बता दें कि सत्रारंभ का समापन समारोह शनिवार को होगा।

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