सेना का जवान और कलमकार कभी सेवानिवृत्त नही होता : विवेक अग्रवाल

माय टाइम्स टुडे, अभिषेक सिंह। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह के दुसरे दिन के पहले सत्र को पत्रकारिता जगत के डाॅन के रूप में पहचाने जाने वाले विवेक अग्रवाल ने सम्बोधित किया ।
आतंकवाद,अपराध और पत्रकारिता विषय पर नवागत विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए विवेक जी ने कहा कि पत्रकार को अन्दर से अनुशासित और बाहर से अराजक होना चाहिए क्योंकि अपराधियों की तरह व्यवहार करके ही अपराधियों को पकड़ा जा सकता है । यदि आप के अन्दर जुनुन , दीवानगी है तभी आप पत्रकार बन सकते हैं। जो स्वयं को भूल सकता है, परिवार को भूल सकता है वही अपराध पत्रकारिता कर सकता है। पत्रकारिता किसी समय की पाबन्द नही होती न ही यह काम सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे वाला है।
जिसने भी इस तरफ एक भी कदम बड़ा दिया है समझो वह अपराध पत्रकारिता में आ चुका है।

पत्रकारिता जल्दबाजी में लिखा गया साहित्य है :
पत्रकारिता को परिभाषित करते हुए अग्रवाल जी ने कहा कि पत्रकारिता जल्दबाजी में लिखा गया साहित्य है। कवि, साहित्यकार, नाटककार और लेखक के पास अपनी बात लिखने का वक्त होता है, पत्रकार के पास वक्त की कमी होती है।

पढ़ने से बढ़ता है शब्दकोष: 
नवागत छात्रों से श्री विवेक जी ने कहा कि जितना हो सके पढ़े। जिससे शब्दकोष बड़ेगा, जो एक पत्रकार के लिए जरूरी है। इलेक्ट्रानिक मीडिया में शब्दों का संकट पत्रकारों के सामने देखा जा सकता है। जिसके परिणाम स्वरूप शब्दों को दोहराया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाएं देने का माध्यम नही है बल्कि इससे आगे की दुनिया है। हमारा पहला कर्म सत्य को उजागर करना है। पत्रकार को आम जनता के प्रति जवाबदेय होना है न कि संस्थान या सरकार के प्रति।
उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं जनता का खबरी हूँ और यह जिम्मेदारी मैने सदैव निभाई है।
अनुशासन पर कहा कि किसी खबर की प्रमाणिकता की जांच कर लेनी चाहिए। सीधे खबर प्रसारित करने से बचना चाहिए।
सोशल मीडिया को अफवाहों का बाजार बताते हुए कहा कि इससे बचना चाहिए। सोशल मीडिया से सूचनाएं प्राप्त नही होती हैं सिर्फ अफवाहें फैलाई जाती है।
पत्रकारों को अपने विचार रखने के लिए भी कहा जिससे सूचना की स्थिति सही बनी रहे।
पीत पत्रकारिता को ब्लैक मेलिंग की तरह से प्रयुक्त करने से बचने की हिदायत दी।
जो छात्र अपराध पत्रकारिता करना चाहते हैं वे सभी अपने मुखबिर बनाएं। कोई भी मुखबिर अपवित्र नही होता है।
धर्म, वासना, अपराध और मनोरंजन को अखबारों का बाजार बताते हुए कहा कि जो पत्रकार सौ प्रतिशत खरी खबरें देता है वही वास्तव में पत्रकार है।
किसी घटना को समाचार बना कर अगर पत्रकार को खुशी नही मिलती है तो समझ लो की उस व्यक्ति की पत्रकारिता सूख गई है। साथ ही साथ यह भी कहा कि सूचनाएं पाने का उत्साह सदैव पत्रकार के अन्दर होना चाहिए। खबर छपे या न छपे पर कोशिश हमेशा करते रहना चाहिए।


सेना का जवान और कलम का जवान कभी सेवानिवृत्त नही होता है। पत्रकार अपने पूरे जीवन समाज के प्रति समर्पित रहता है।
जो चित्र मीडिया बनाता है, वही आम लोगों के दिमाग में बनता है।
सत्य, तथ्य और कथ्य सदैव एक अपराध पत्रकार को बचाकर रखना चाहिए। जो पत्रकारिता का मूल है।
छात्रों को बताया कि आप के अन्दर कुछ जानने की इच्छा है तभी खबर बना सकते हैं। अपनी कला और पेशे में परांगत होना चाहिए, जिसके लिए अभ्यास की और टीम वर्क की जरूरत होती है।
पत्रकारिता में तात्कालिकता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पत्रकारिता में समय का बहुत ही महत्व है। कानून का उल्लंघन और ताकतवर लोगों के गलत कामों पर उंगली उठाना और उन्हें जनता के सामने लाना ही पत्रकारिता है।

सत्य पानी से नहीं धूलता : 
अन्त में कहा कि सत्य को पानी से नही रक्त से ही धोया जा सकता है। पत्रकारों को कभी यह स्थिति नही आने देनी चाहिए। मन, कर्म और वचन से पत्रकार बनें। पत्रकारिता कभी सत्ता की नही होती है। पत्रकारिता का एक मात्र उद्देश्य आम जनता की भलाई है इसके अतिरिक्त कुछ और नही है ।

इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० बृज किशोर कुठियाला, जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी, पत्राकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ राखी तिवारी, डॉ अविनाश वाजपेयी,  डॉ पवित्र श्रीवास्तव, डॉ पवन मलिक, लोकेंद्र सिह राजपूत समेत अन्य गणमान्य लोग मौजुद थे

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