दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं : सुदीप्तो सेन

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माय टाइम्स टुडे, भोपाल । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय ने गुरूवार को नगर के समन्वय भवन में नए छात्रों के मार्गदर्शन के लिए सत्रारंभ समारोह का आयोजन किया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह के पहले दिन नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने सत्रारंभ के पहले सत्र में छात्रों से अपने अबतक के सफर के अनुभव साझा किए।साथ ही आजतक चैनल के वरीष्ठ एंकर सईद अंसारी ने भी छात्रों को टेलीविजन पत्रकारिता के क्षेत्र में अवसर और आने वाली चुनौतियों से रूबरू कराया।  कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० ब्रजकिशोर कुठियाला ने किया।
सत्रारंभ के दुसरे सत्र में ‘फिल्म निर्माण में करियर ‘ विषय पर बोलते हुए प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक सुदीप्तो सेन ने कहा कि आरंभ में सिनेमा समाज की परछाई हुआ करता था जो समाज में होने वाली घटनाओं पर आधारित होता था। हम जो भी चीजें अपनी आस पास देखते थे उस पर फिल्में बनाते थे और लोगों को दिखाते थे। तब सिनेमा के पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे, लेकिन समय के साथ सिनेमा और उसका परिवेश बदलता गया।
फिल्म निर्माण में करियर की बजाय कला पर ध्यान दें :
श्री सेन ने बताया कि फिल्म को करियर की बजाय कला समझ कर काम करने की जरूरत है। उन्होनें कहा कि हमें कोई भी फिल्म बनाने से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि हम किसके लिए और क्यों फिल्म बना रहे हैं। जब तक फिल्म बनाने का सार्थक ध्येय नहीं होगा, उसका लक्ष्य नहीं होगा तब तक एक सफल फिल्म बनाना मुश्किल है।
दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है :
फिल्म निर्माण में आने वाली चुनौतियों के बारें में बोलते हुए श्री सेन ने बताया कि दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। अगर आप सपने देखते हैं तो कुछ भी संभव है। अगर आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित है तो एक न एक दिन आपको कामयाबी जरूर मिलेगी।
शार्ट फिल्में आमदनी का एक अच्छा माध्यम है :
आज तक टेलीविजन के एंकर सईद अंसारी के सवाल का जवाब देते हुए श्री सेन ने बताया कि शार्ट फिल्में आमदनी का एक अच्छा माध्यम है। हम छोटी छोटी फिल्में बनाकर यूट्यूब या अन्य मीडिया प्लेटफार्म के जरिये आमदनी कर सकते है।
भारतीय फिल्मों को बॉलीवुड कहना बंद कर देना चाहिए :
श्री सेन ने भारतीय सिनेमा पर बोलते हुए कहा कि हमें भारतीय सिनेमा को बॉलीवुड कहना बंद कर देना चाहिए। दुनिया के अन्य देश अपने सिनामा का नाम अपने देश पर आधारित रखते है। हमें भी अपने सिनेमा का नाम बदलकर बॉलीवुड की बजाय भारतीय सिनेमा कर देना चाहिए।

इस मौके पर जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी, पत्राकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ राखी तिवारी, डॉ अविनाश वाजपेयी,  डॉ पवित्र श्रीवास्तव, डॉ पवन मलिक, लोकेंद्र सिह राजपूत समेत अन्य गणमान्य लोग मौजुद थे।

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One Thought to “दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं : सुदीप्तो सेन

  1. Abhishek singh

    “सिनेमा आपको चुनता है, आप सिनेमा को नही ।”
    – सुदीप्तो सेन

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