खाली हाथ तो लौटा मगर कभी खाली दिल नहीं लौटा : कैलाश सत्यार्थी

You can share it

माय टाइम्स टुडे, भोपाल 27 जुलाई। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय ने गुरूवार को नगर के समन्वय भवन में नए छात्रों के मार्गदर्शन के लिए सत्रारंभ समारोह का आयोजन किया। तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह के पहले दिन नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने सत्रारंभ के पहले सत्र में छात्रों से अपने अबतक के सफर के अनुभव को साझा किया।

कैलाश सत्यार्थी के संबोधन की महत्वपूर्ण बातें- 

काश मैं भी इस विश्वविद्यालय में पढ़ा होता :
छात्रों को संबोधित करते हुए श्री सत्यार्थी ने बताया कि यह आपका सौभाग्य है कि आपने माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया है। आज मैं सोचता हूं कि काश मैं भी इस संस्थान में पढ़ा होता। उन्होनें छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आप एक नई शुरूवात करने जा रहे हैं। आपकी पढ़ाई एक यज्ञ की तरह है। आगे आप जो भी करेंगे वह महज कहानी नहीं रहेगी बल्कि उसके पिछे कई जिंदगियां जुड़ी होगी। इसलिए एक – एक शब्द आपके लिए महत्वपूर्ण है।

यह भी पढ़े : दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं : सुदीप्तो सेन

आजादी की कोई कीमत स्वीकार नहीं होनी चाहिए :
श्री सत्यार्थी ने छात्रों को बताया कि हमें कभी भी आजादी से समझौता नहीं करना चाहिए। हमेशा गरीब और वैसे लोग जो हासिये पर है उनको उपर उठाने के लिए संघर्ष करना चाहिए।

खाली हाथ तो लौटा पर खाली दिल तो कभी लौटा ही नहीं :
अपने संघर्ष यात्रा के बारे में सभा को संबोधित करते हुए श्री सत्यार्थी ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रध्यापक की नौकरी छोड़कर जब दिल्ली गया तब मेरे पास महज 180 रुपए थे फिर भी हिम्मत नहीं हारी। कई बार मुझपे और मेरे सहयोगियों पर हमले हुए, उसके बाद भी हमने संघर्ष जारी रहेगा नाम से पत्रिका निकाली। तब मैं स्वयं ही साईकल चलाकर पत्रिका बेचा करता था। हमने शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए अनेकों चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और अंतत: शिक्षा को मौलिक अधिकार में शामिल किया गया।

युवा समस्या नहीं, समाधान है :
श्री सत्यार्थी ने छात्रों को युवा शक्ति का एहसास कराते हुए बताया कि युवा हीं देश का भविष्य है। कुछ लोग युवाओं को समस्या समझते है पर वास्तव में युवा ही समाज की शक्ति है। युवा ही तमाम तरह की समस्याओं का समाधान है।

दुनिया गरीब है, यह झूठ है: 

यदि विश्व भर का एक सप्ताह के सेना का खर्च कम कर दिया जाए या फिर यूरोप में लिपिस्टिक-पाउडर पर खर्च होने वाला छठवां हिस्सा‍ बचा लिया जाए या अमेरिका में तंबाखू पर होने वाले खर्च का पांचवा हिस्सा बचा लिया जाए तो दुनियाभर के सारे बच्चों को स्कूल में पढ़ाया जा सकता है।

हमें इतिहास बदलना है :
छात्रों को संबोधित करते हुए श्री सत्यार्थी ने बताया कि हमें इतिहास बदलना है। उन्होने कहा कि इतिहास वो नहीं बदलते जो मैदान के बाहर होकर तालियां बजाते है, इतिहास वह बदलता है जो हार जीत की परवाह किए बिना रिंग में कूद पड़ता है।इसलिए हमें हमेशा अपने अंदर चिंगारी जला के रखनी है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० ब्रजकिशोर कुठियाला ने किया। तथा मंच का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया। इस मौके पर आजतक टेलीविजन चैनल के वरीष्ठ एंकर सईद अंसारी, पत्राकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ राखी तिवारी, डॉ अविनाश वाजपेयी,  डॉ पवित्र श्रीवास्तव, डॉ पवन मलिक, लोकेंद्र सिह राजपूत समेत अन्य गणमान्य लोग मौजुद थे।

1 thought on “खाली हाथ तो लौटा मगर कभी खाली दिल नहीं लौटा : कैलाश सत्यार्थी

  1. समरथ को नही दोष गोसाई, रवि पावक सुरसरि की नाई ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *